How to get traffic to your website from specific country in hindi

किसी specific contry को target करने के लिए कुछ आसान से टिप्स जो आपको target country website traffic बढ़ाने में मदद करेगा।

target specific audience

यह टिप्स seo based tips है जो मैंने seo rules को ध्यान में रखकर research किया है। जब आप शुरुआत से ही किसी targeted country audience को अपने वेबसाइट पर लाना चाहते है तो इसकी seo strategy भी आपको वहीं से करना ज्यादा अच्छा रिजल्ट दे सकता है।

इस geo targeting से हम साइट पर traffic drive करने का फायदा तो ले ही सकते है साथ है हमें regular audience भी मिलते है जिससे हमारा bounce rate भी नहीं बढ़ता। और साथ ही cpc rate भी ज्यादा रहता है।

google search engine जो को बहुत ही ज्यादा उपयोग में लाया जाता है, किसी भी यूजर को सबसे पहले local base information प्रदान करता है। जिससे यूजर को सबसे पहले अपने आस पास की जानकारियां search result page में मिलती है। इस तरह के रिजल्ट को शो करने के लिए सर्च इंजन search queries को टारगेट करके जिस language में सर्च किया गया हो उसी में रिजल्ट शो करता है।

इसके साथ ही user location की मदद से लोकल जानकारी सर्च करता है। इस जानकारी को निकालने के लिए इंजन ब्लॉग से कुछ डाटा वेरिफाई करता है इसी डाटा के जरिए हम किसी विशेष देश को टारगेट कर सकते है और वहा से traffic gain कर सकते है।

1. CC top level domain

आपके ब्लॉग में किसी एक country based content है जो केवल उसी specific country के लिए बनाया गया हो। जैसे कि किसी country level education या country base rules या अन्य कुछ भी जानकारी जो केवल उस कंट्री के लिए उपयोगी हो जिसे टारगेट किया जा रहा हो। ऐसे ब्लॉग या वेबसाइट के लिए country code top level domain को इस्तेमाल किया जाता है।

अपने यह देखा होगा कि जब भी आप किसी क्वेरीज को सर्च करते है तो आपके सामने बहुत सारे रिजल्ट दिखते है। सभी रिजल्ट केवल two types extension के ही होते है। जिसमें एक .com, .org or .net extension ऐसे डोमेन globle base search result में शो करते है अगर आपके डोमेन नेम में यह extension है तो अपने ध्यान अवश्य देखा होगा कि इसमें international visitor भी आते है जो आपके देश के नहीं होते।

सेकंड एक्सटेंशन जो आपको सर्च रिजल्ट में देखने को मिलता है वह अलग अलग देश के लोगो के search result में अलग अलग होते है जैसे indian users के लिए हमेशा .in extension वाले रिजल्ट ही शो होगा और यदि यूजर unitede state का हो तो उसे .us वाले एक्सटेंशन से जानकारी मिलेगी।

इन दोनों प्रकार के रिजल्ट में जो किसी Country code के साथ होता है जैसे कि .in, .us, .de ये सभी country code top level domain होते है। ऐसा डोमेन केवल इसी कंट्री के search ranking में आते है जिसका extension domain में इस्तेमाल किया गया हो।

target country to website traffic in hindi

अब आप समझ ही गए होंगे कि यह किस तरह किसी एक देश के ऑडिएंस को टारगेट करता है।

2. Search console: international targeting

यह सर्च कंसोल द्वारा कंट्रोल किया जाता है। ये बात तो आप जानते ही है कि अपने sitemap.xml को web master tools के द्वारा सर्च इंजन में सबमिट किया जाता है। इससे हम इंजन को अपने site structure और availble content की information provide करते है।

साइटमैप वेरिफाई हो जाने के बाद सर्च कंसोल हमें बहुत से tools provide करता है। लेकिन यह हम उसी टूल्स के बारे में बात करेंगे जो country-specific traffic generate करने में मदद करेगा।

Legacy tools and report का ऑप्शन सर्च कंसोल में एक ऐसा टूल्स प्रोवाइड करता है जो किसी भी target country tarffic को साइट में लाने में और आपके साइट को उस देश में index और rank के लिए यूज करता है।

लेगेसी टूल्स में geo target setup करने के लिए बस आपको search consol login पेज कर जाना है और लॉगिन करना है। इसके बाद आपको नेविगेशन मेनू से International targeting option पर क्लिक करना है। आपके सामने country choose करने का ऑप्शन आ जाएगा। आप जिस देश की ट्रैफिक चाहते है वह सर्च करके सेलेक्ट कर दे।

international geo targeting tools search console

3. Country based writing language

यह best target method है। सर्च क्वेरीस के द्वारा ही हम किसी नतीजे पर पहुंचते है और इसी से हमें SERP मिलता है। लेकिन क्या आप जानते है कि search queries को सबसे पहले analyse किया जाता है कि यह किस भाषा में है, इसमें इस्तेमाल हुआ वर्ड किस location में यूज किया जाता है, इंटर किया गया सेंटेंस किस language का है और current user location क्या है उसके बाद ही हमें Search engine result page मिलता है।

चलो इस गहराई से समझते है। उदाहरण के लिए मैंने सर्च किया कि “where is india” और “इंडिया कहा है”। इन दोनों queries में यदि मै सबसे पहले वाले को बताऊं तो सबसे पहले इसमें ये देखा जाएगा कि यह सर्च alphabet font में किया गया, उसके बाद इससे बना शब्द और सेंटेंस किस भाषा का है। इसके बाद उसके उत्तर के लिए उसी भाषा में पेजेस सर्च किए जाएंगे और answer आपके सामने दिखाया जाएगा। इस खोज में आपको इंग्लिश में ही परिणाम मिलेगा क्योंकि यह उसी लैंग्वेज के वर्ड से सर्च किया गया है।

अब आते है दूसरे में “इंडिया कहा है” तो इसे भी उसी प्रकार एनालाइज करके पूछे गए भाषा में खोज परिणाम देगा। यहां पर हिंदी भाषा में इसी भाषा के शब्द से पूछा गया है तो हिंदी जवाब ही सामने आएगा। इसके जगह पर अगर में ये सर्च करू कि “india kaha hai” तो भी हिंदी परिणाम ही मिलेगा क्योंकि सर्च सेंटेंस हिंदी है।

यह एक बहुत ही अच्छा तरीका है target audience traffic लाने का। इसके लिए आपको उस location language का जानना आवश्यक है जिसे आप निशाने पर रख रहे है।

4. Setup site language

किसी भी ब्लॉग की भाषा उसी searches में परिणाम दिखाने में हेल्प करती है। मगर आपके ब्लॉग भाषा और लेखन भाषा अलग अलग है तो लिखा हुआ content language को ही प्राथमिकता दी जाती है। मगर ऐसा बहुत कम ही होता है या नहीं के बराबर रहता है कि आपका लिखने और ब्लॉग साइट कि भाषाएं अलग अलग हो। अब थोड़ा और गहराई में जाते है।

blog language code कि जानकारी गूगल और अन्य इंजन के पास रहती है जिसमें हमारे website language setup कि जानकारी भी होती है। यह दो शब्दो के कोड में रहता है। जब कोई user search करता है तो अगर आपका ब्लॉग टॉपिक सर्च टॉपिक के रिलेटेड होगा और आपका वेबसाइट पूछे गए भाषाओं में है तो वह एनालाइज होगा और परिणाम में आपका साइट भी दिखाया जाएगा। भाषा की जानकारी blog coding के द्वारा लगाया जाता है।

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